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दीपों की बारात सजी है

दीपों की बारात सजायी .. मन में खुशी की बजी शहनाई  देव अतिथि बनकर आयें फिर शुभ ही शुभ क्यों ना हो भला .....  शुभागमन देवों का  स्वागत के शुभारंभ में  बंदनवार सजाये ..   सुन्दर आकर्षक रंगोली आंगन में बनायी  दिवारों पर चमकीली झालरें लटकायीं  आलों में दीपक जलाये  अदिति सत्कार में पकवान बनाये  कुछ स्वादिष्ट मिष्ठान बाजार से ले आये देव आगमन श्री विष्णु लक्ष्मी जी के स्वागत में  राहों में अपनी पलकें बिछाई  अमावस्या की रात थी चन्द्रमा भी छुट्टी पर था ..  जगमगाते दीपकों के प्रकाश से सारी नगरी जगमगवायी  कुछ आतिशबाजी भी आसमान की ऊंचाईयों में जगमगवायी ... देव आगमन में हमने दीपकों के प्रकाश से थाली भी सजायी ..  मानों सितारों की मण्डली हो धरा पर हो उतर आयी ... श्री विष्णु लक्ष्मी जी के स्वागत में हमने दीपावली मनायी  चेहरों पर खुशी की फुलझडियां खिलायीं‌ ... यूं ही जगमगाती रहे जीवन में खुशियों की फुलझडियां  ऋद्धि - सिद्धि .. सुख - समृद्धि से सम्पन्न हो‌ जीवन का हर पल ... देव अतिथि बनकर आयें फिर शुभ ही शुभ क्यों ना हो भ...

त्यौहार जीवन आनंद

त्यौहारों आते हैं, समाज में शुभ साकारात्मक संदेश लाते हैं...  तय + औ + हार ... तय समय में किये गये शुभ कार्य जो जो युगों - युगों तक समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन पूजनीय हो गये .... जीवन जीने का संदेश दे आनंद बन गये ... त्यौहारों का संदेश ऐसा जीवन जीना कि समाज युगों - युगों तक याद करें पूजा करे एवं स्वयं को कृतज्ञ करें  .  त्यौहार उत्सव हैं ,मंगल बेला का शुभ संदेश है ... त्यौहार बंधन नहीं ..  त्यौहार तो जीवन का आनंद है .... शुभ संकेत है ...  देश , परिस्थिति और काल के अनुसार जीवन में शुभ साकारात्मक प्रेरणास्पद कर्म करने का . ‌.. त्यौहार जीवन में रंग भर एक नयी उर्जा प्रदान करते हैं  त्यौहार जीवन में उत्साह एवं उमंग की शुभ तरंगें लेकर आते हैं .. ... और संस्कृति और  संस्कारों का दर्शन कराते हैं.... प्रत्येक त्यौहार स्वयं में एक विशेष महत्व लिए होता है... कोई ज्ञानवर्धक संदेश... समय ,काल  एवं परिस्थितियों का परिवेश ... लिए विशेष महत्व को दर्शाते हैं‌ हमारे त्यौहार ... त्याग, तपस्या बलिदान‌, एवं कोई ना कोई प्रेरणा दायक संदेश अवश्य देते हैं हमारे त्यौहार...

दीपावली

आओ इस बार दिवाली कुछ अलग अंदाज में मनाते हैं  थोड़ा आप मुस्कुराओ थोड़ा हम मुस्कुराते हैं   चेहरों पर हंसी की फुलझडियां खिलाते है  बंदनवार सजाते हैं रंगोली बनाते हैं ... इस बार दिवाली की सफाई में मन में छिपे सारे.. शिकवे - शिकायतों की गंदगी हटाते हैं  आओ हम सब मिलकर अपने-अपने दिलों में परस्पर के प्रेम के दिये जलाते हैं , अमावस्या की रात में रोशनी का माहौल बनाते हैं  आतिशबाजी से आसमान जगमगाते हैं   प्रकाश का उत्सव मनाते हैं .. अपने प्रभु ईष्ट के स्वागत में द्वार - द्वार दीपक का प्रकाश कर वातावरण को शुद्ध साकारात्मक बनाते हैं  थोड़ा आप मुस्कुराओ थोड़ा हम मुस्कुराते हैं चेहरों पर  हंसी की फुलझडियां खिलाते हैं  परस्पर प्रेम का संचार शुभकामनाओं के उपहार देते जाते हैं .....  इस बार दिलों के अंधकार मिटाते हैं  निस्वार्थ प्रेम से अपनत्व के बीज बोते जाते हैं ... चेहरों पर हंसी की फुलझडियां खिलाते हैं .....

नवदुर्गा

नव दुर्गा हूं नौ रुपों में  घर- घर पूजी जाती हूं  मां गौरी की महिमा भक्तों को बतलाती हूं  कन्या रुप में जन्म लेकर मैं ही तो सबके घर आती हूं  सौभाग्य शाली हैं वो जन होते जो मेरी महिमा गाते हैं  सृष्टि की आधार शिला हूं .. शक्ति मैं कहलाती हूं  महागौरी और महाकाली भी मुझमें ही तो समाती है  समस्त जगत की आधारभूता हूं  सरस्वती ,लक्ष्मी जन- जन की पालनकर्ता  मैं शक्ति रुपा शकिस्वरुपा  मैं ही कन्या रुपा मां गौरी कात्यायनी हूं  समस्त जगत का भार उठाती  बोझ समझ जो पीछा छुड़ाते  अपने भाग्य को स्वयं सुलाते  ऋद्धि - सिद्धि के भंडारे मुझमें ही तो बसते हैं मां की महिमा को मानकर  मां का स्वागत करते हैं  मन- मंदिर में सच्ची श्रद्धा से जो‌  मां की भक्ति करते हैं  जगत जननी की कृपा से धन्य - धन्य हो जाते हैं ।।  

खूबसूरत मन

 वक्त के रंग में रंग जाया करो   हर रंग तुम्हें .. तुम्हारी पसंद का मिले   यह तो मुमकिन नहीं .... जो रंग मिले उसे अपनी पसंद बनाया करो  क्या पता तुम उस रंग ही में बेहतरीन लगो  जो रंग तुमने पाया है  हर रंग में तुम रंग जाया करो‌... सभी रंग तो अपने हैं..  जीवन के सुन्दर सपने हैं  कोई रंग मिले भद्दा तो उससे कर किनारा  आगे बढ़ जाया करो  बेवजह ना सोचने में वक्त जाया करो  ज़िन्दगी को खूबसूरत रंगों से सजाया करो  जो रंग मिले उसमें रंग जाया करो  भीतर श्वेत निर्मल रंग को समाया करो  सभी रंग तो अपने हैं  जीने के ढंग अपने हैं‌  देख हर रंग मुस्कुराया करो  खूबसूरती मन में होती है ‌‌‌‌‌सबको यह बात बताया करो ।। 

मौसम ( बदलता वक्त)

 मौसम ने भी बदली करवट  मेघों ने आकाश को घेरा ..   * मौसम  बोला *  बिन मौसम बरसूंगा  जी भर कर बरसूंगा  तुम बदले ... वक्त बदला   दुनियां के रूप बदले   जीने के ढंग बदले   तो मैं क्यों ना बदलूंगा  तुम से ही जुड़ा हूं  करनी पर तुम्हारी ही तो टिका हूं  सब बदल रहें हैं तो मैं क्यों ना बदलूं   मैं तो मौसम हूं यूं भी बदलता हूं वक्त के दौर के साथ करवट बदलता हूं  फिर ना कहना ... बदल रहे हो  ऐ मनुष्य तुम्हारे जीने का ढंग बदला  मेरा भी समय बदला .... देर - सवेर ही सही  लौट कर आ ही जाता हूं ... मैं मौसम हूं  प्रकृति का पुजारी हूं .. वसुन्धरा पर अपने जलवे दिखाता हूं ... रहता हूं सदा समर्पित .. मेरा अस्तित्व है सृष्टि को समर्पित  सृष्टि जो बदलेगी तो बदलाव मौसम में तो अवश्य आयेगा ।।

आगे की ओर

सब कुछ लौटकर आता है  एक अंतराल के बाद  अपनी प्रतिक्रिया निभाकर  जल ... कैसे रूक जाऊं  क्यों थक जाऊं  आगे बस आगे की ओर  बढ़ना ही तो मेरा लक्ष्य है  समा लेता हूं समर्पित तत्व बहा ले जाता हूं आगे की ओर  किनारों पर पहुंचा  भीतर समस्त निर्मल  नियति ही मेरी ऐसी है भीतर की ऊर्जा प्रेरित करती है   स्वभाव से निर्मल हूं शीतल भी हूं  वातावरण को नम रखता हूं  वाष्प बनकर मेघों का रूप भी धरता हूं  आकाश की ऊंचाईयों को छूने की कोशिश करता हूं ‌ फिर एक दिन धरती पर ही बरस जाता हूं  मैं नदिया का बहता जल हूं बूंद -बूंद बनकर वर्षा ऋतु में अपने अस्तित्व जल में मिलकर जलमग्न हो बहती सरिता हो जाता हूं .... सरल समझ धोखा मत खाना  बाहर से शीतल हूं .. भीतर एक आग लिए बैठा हूं  मैं नदिया का बहता जल हूं मैं  सत्तर प्रतिशत मनुष्य प्राणों में भी होता हूं  मैं जल हूं मैं तरल हूं मैं जीवन दान हूं  मेरा संरक्षण करोगे तो जीवन का सुख पाओगे ...