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यूं ही बेवजह मुस्कराया करो

यूं ही बेवजह  मुस्कराया करो  माहौल  को खुशनुमा बनाया करो  जिन्दगी आपकी है इसे ना बेवजह   उलझनों में उलझाया करो ... शिकवे शिकायतों में ना वक्त जाया करो... मुश्किलों का दौर आये तो थोड़ा रूक जाया करो  परिक्षाओं की घङी जान थोडी सूझ-बझ से  हल निकाल लिया करो ..  वक्त है साहब बदल ही जाता है  आंधियों का आना तो दस्तूर  है  सब्र का बांध बना नया रास्ता बना लिया करो  असम्भव  कुछ  भी नहीं ,असम्भव  को सम्भव  कर दिखाने की कला अपनाया करो  . मानव  मस्तिष्क की क्षमता पर विश्वास  बढाया करो ... मुश्किल  प्रश्नों के उत्तर  निकाल  जीत का परचम लहराया करो ..

एक रंग स्नेह का ...

एक रंग स्नेह का .. सबका रुचिकर  होठों पर लिए मुस्कान लिए नरम- नरम गुजिया चटपटी चाट  कांजी का लोटा भी भर लायी हूं मैं  इस होली सबके दिलों में प्रेम  का रंग चढाने आयी हूं मैं ...     रंगों के इस त्यौहार में  कुछ  रंग मैं भी लायी हूं.. लाल गुलाल गालों की लाली के लिए  केसरी तिलक माथे तिलक के लिए   हरा रंग चंहू  ओर हरियाली के लिए  सुख -समृद्धि के लिए  रंगों का त्यौहार है  फाल्गुनी मौसम में रंग बिरंगे पुष्पों की कतार है .. हवाओं में मीठी सी तकरार है  कभी सर्द  कभी गर्म  गुनगनाहट का मीठा एहसास है  गेंदा से सुरमयी आधार है  बोगीबेलिया से चहूं और बहार है ..

आप और हम

आपके गुण आपके अपने हैं  इन्हें कोई आपसे छीन नहीं सकता .. आप अपने जैसे रहो हम हमारे जैसे  किसी के जैसा बनने में क्यों अपनी असलियत बिगाङें.. दिखावे का जमाना है खोखलापन सबको भाता है  असलियत  का सच शांत बैठा मन ही मन विचलित  हो जाता है .  खूूबसूरती तो सबको भाती है  खूबसूरती की संभाल नजाकत  से की जाती  यह बात  बहुत  कम  लोगों को समझ  में आती है ... पहचानते हैं लोग आपको आपकी हैसियत से  हैसियत भी ऐसी .. जिसकी हो सकती है कभी भी  ऐसी की तैसी ..  वक्त  का खेल  है सारा  हैसियत का लगा दो पांच सितारा  फिर  हर कोई  होगा तुम्हारा .. आप कितने ज्ञानी हैं ..कोई  नहीं जानता  आप कितने दानी हैं ..फिर  तो हर कोई  पहचानता .

पवित्र अमृत वरदान

मन की सन्तुष्टि से बड़ा कोई  धन नहीं  मिल जाता है सब कुछ ,इसके बाद कुछ  पाना शेष नहीं रह जाता  अध्यात्म  की राह यानि स्वर्ग  की राह .... जिसे पाने के बाद  कुछ शेष नहीं रह जाता ..

अच्छा हुआ ..

अच्छा हुआ जरूरत  के समय  कोई  काम  नहीं आया  इसी बहाने  मैं मेरे रब के और करीब  आ गया .. मैं ही भटकता - फिरता था .. अपनों की तलाश  में ... जो अपना था वो पास था ..उसका एहसास  था  पर दिखाई नहीं देता था .. लेकिन  जो पास थे हर रोज हाथ  मिलाते थे  उनसे अपनापन ना मिला.. वो भी किसी ओर की तलाश में थे  . जमाने भर में सेवा का ढोंग  करते रहते हैं  जरूरत  होने पर अपनों के ही काम  नहीं आते .. सेवा में भी दिखावा..स्वयं की आंखों में पट्टी  बांधकर  दूसरों की आंखों में धूल झोंकना.. चलना हो साथ तो लाख बहाने बना देते हैं  कहने को दुनियाभर में खुशियां बांटते  फिरते हैं .. जिन्हें अपना कहते हैं उन से परायों सा बर्ताव  करते हैं ..  कोई  किसी का अपना नहीं सब अपना मतलब हल करते हैं .  सफर को पूरा करने की तलाश में सब अधूरे से  अधूरी राहों पर सफर करते हैं ..

ऊं नमः शिवाय

भोलेनाथ की महिमा आपार   जहर भला किसको है भाता  शिव को ना भांग धतूरा गांजा भाता  शिव ने सब विष पान किया  संसार पर उपकार  किया .. भाग ,धतूरा ,गांजा अफीम आदि जहरों का उत्पात वसुन्धरा पर फैला देता महाविनाश  भोलेनाथ की महिमा भारी कंठ धारण कर डाले जहरीले विष  विष का असर हुआ कंठ नीला ,ताप तन का चढ आया  प्रदान  शीतलता करने को गंगाजल , दुग्ध ,दही शहद भरपूर चढाया...   शिव में मन को एकीकार कर  भस्म  की रस्म को निभा दिया    मन को कर समर्पित  तन को शव समान किया  ऊं नमः शिवाय  ऊं नमः शिवाय   का जाप करते - करते मन का सब भ्रम मिटा  कण - कण में तब बस शिव बस शिव  है एसा मन को बोध हुआ ...

स्वावलंबन

Good morning to all respect personalities judes & my dear friends   देना है कुछ उपहार कुछ नायाब  मुझे इससे बेहतर  कुछ  ना समझ  आया ..उपहार  में शुभकामनाओं सहित  अपनी मुस्कान  दे रही हूं .. स्वीकार  है .. साधारण हूं, इसीलिए  असाधारण हूं ...साधारण  समझ हल्के में मत लेना.. भीतर  एक आग लिए  बैठी हूं मैं नदिया की बहती जलधारा हूं .. अपने ही हाथों लिखनी अपनी तकदीर  सुनहरी है  स्वयं का स्वयं पर विश्वास जरुरी है  चलो उठो .. स्वावलंबन की करो तैयारी ..  वक्त यही है, वक्त सही है . स्वयं की पहचान  स्वयं की रक्षा,  स्वयं का उत्तरदायित्व है ..अब लक्ष्य तुम्हारा स्वावलंबन का है बनना अमिट सितारा ... विद्योतमा हैं हम ,संघर्षरत हैं हम ,कर्मठ हैं हम अनुशासित हैं हम.. स्वावलंबन का गुण भी है हममें ..स्वावलंबी बनना हक है हमारा .. नारी कह कर.. ना- री ..बस अब और नहीं सुनना  ध्रुव, एकलव्य, प्रह्लाद आदि महापुरुष भी परवरिश हैं हमारी  प्रतिभा पाटिल ,दौपदी मुरमुर..ने स्वावलंबन से सच कर दी राज योग की कहान...